स्वास्थ्य विभाग में नियोजन को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन
ग्रामीण चिकित्सक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशु तिवारी के नेतृत्व में ग्रामीण चिकित्सकों के नियोजन लेकर चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा अभियान
ग्रामीण चिकित्सकों को परेशान करना बंद कर करके उनका सम्मानपूर्वक पद पर विराजमान करें सरकार-अंशु तिवारी
वर्षों से ग्रामीण चिकित्सकों को नजरअंदाज कर रही सरकार, आपदाकाल में जान पर खेलकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नया जीवन देते हैं ग्रामीण चिकित्सक- दयाशंकर तिवारी
पटना- ग्रामीण चिकित्सक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशु तिवारी द्वारा ग्रामीण चिकित्सकों के हित को लेकर सरकार के मुख्यधारा से जोड़ने के कोशिश की कड़ी में पटना के गर्दनी बाग पर के धरना स्थल पर 11 फरवरी 2025 से ही धरना देने का कार्य किया जा रहा है ताकि प्रदेश के लगभग 50000 चिकित्सकों को सम्मान से जीने का अधिकार दिलाया जा सके साथ ही इनको भयमुक्त माहौल मैं कार्य करने का व्यवस्था कायम किया जा सके इनके स्थल पर बिहार के लगभग सभी जिलों से अच्छे-अच्छे ग्रामीण चिकित्सा से जुड़े लोग प्रतिदिन पहुंच रहे हैं प्रतिदिन 500 से 1000 लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं अपनी समस्याओं को उन तक पहुंचाते हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने की हर व्यवस्था मुफ़्त में ग्रामीण चिकत्सकों के लिए की जाती है इसी कड़ी में आज बक्सर लोधास गांव से प्रसिद्ध चिकित्सक दयाशंकर तिवारी पहुंचे और ग्रामीण चिकित्सकों का हौसला बढ़ाएं इन्होंने कहा कि वर्षो से ग्रामीण चिकित्सक उपेक्षित रहे हैं सरकार हमेशा इन लोगों को नजरअंदाज करती चली आ रही है वही जब आपातकालीन समय आता है तो सरकार ग्रामीण चिकित्सकों का उपयोग अधिकारपूर्वक कर लेती है लेकिन जब ग्रामीण चिकित्सकों के मान सम्मान की बातें आती है तो सरकार में बैठे लोग चुप्पी साथ लेते हैं जो शर्मसार है और अब समय आ गया है की सरकार से अपनी मांगों को पूरा कराया जाये इन्होंने यह भी कहा कि अंशु तिवारी जैसे राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में जो भी ग्रामीण चिकित्सक चल रहे हैं उन्हें निराशा भी नही होना पड़ेगा क्योंकि इनके जैसा जुझारू नेता किसी वर्ग में नहीं है
गौरतलब हो कि लंबे समय से ग्रामीण चिकित्सकों के नियोजन को लेकर सरकार से मांग की जा रही है जिसको लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशु तिवारी द्वारा सरकार के नियमों का पालन करते हुए चरणबद्ध तरीके से ग्रामीण चिकित्सकों का आवाज बुलंद करते हुए इनकी आवाज को सरकार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है लगातार हो रहे इस आंदोलन से सरकार के लोग भी अवगत हो चुके हैं अब आगे यह देखना है कि सरकार में बैठे लोग ग्रामीण चिकित्सकों के प्रति कितना संवेदनशील होते हैं और किस प्रकार का दिशा निर्देश ग्रामीण चिकित्सकों के लिए जारी होता है
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